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छत्तीसगढ़ शासन, विधि और विधायी कार्य विभाग


प्रस्तावना

  • यह हस्तपुस्तिका विधि और विधायी कार्य विभाग के संगठन, कृत्य, कर्तव्य साथ ही इस विभाग द्वारा सम्पादित किये जाने वाले सभी कार्य पर विस्तृत प्रकाश डालता है। इस विभाग से जो सूचना जनसाधारण प्राप्त कर सकती है, वह मुख्य रूप से नये न्यायालयों की स्थापना, न्यायाधीशों की नियुक्ति, शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति, नोटरियों की नियुक्ति, अभियोजन स्वीकृति आदि से संबंधित है ।
  • हस्तपुस्तिका का मुख्य उद्देश्य इस विभाग द्वारा सम्पादित किये जाने वाले कार्य, निर्णय लेने की प्रक्रिया आदि पर प्रकाश डालना है ।
  • यह हस्तपुस्तिका शासन के समस्त विभाग, अधिवक्ता एवं विधिक क्षेत्र में कार्य करने वाले अन्य व्यक्तियों के लिए उपयोगी है ।
  • हस्तपुस्तिका में उपलब्ध जानकारी के अतिरिक्त और कोई सूचना प्राप्त करना हो तो उसके लिए निर्धारित प्रारूप में शुल्क अदा कर आवेदन प्रस्तुत कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है ।

मैनुअल-1

संगठन की विशिष्टियां, कृत्य एवं कर्तव्य

विधि और विधायी कार्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सचिवालय का एक पृथक अंग है जिसके प्रमुख विधि मंत्री होते हैं । इस विभाग का मुख्य कार्य विधेयक एवं अध्यादेश का परिमार्जन, विधीक्षा एवं अधिनियम अथवा अध्यादेश जारी करना होता है । सम्पादित होने वाले समस्त कार्य, नियम, विनियमन, अधिसूचना आदि का प्रारूपण और परिमार्जन, लोकसभा, विधानसभा आदि के चुनाव कार्य, राज्य के सिविल और आपराधिक न्याय प्रशासन एवं उनसे संबंधित न्याय विभाग के समस्त कार्य, शासन के विभिन्न विभागों को परामर्श, उनके दस्तावेजों और संविदाओं, अभिलेखों का परिमार्जन तथा राज्य से संबंधित विभिन्न प्रकरणों के विवादों से संबंधित कार्य है। ‘‘प्रमुख सचिव विधि पदेन महाप्रशासक एवं आॅफिशियल ट्रस्टी प्रोक्टर होते हैं।’’ यह विभाग न्याय विभाग एवं उच्च न्यायालय का प्रशासकीय विभाग भी है ।

विधि और विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत निम्न शाखायें कार्यरत हैं:-

न्यायिक शाखा-एक:

  • उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय की स्थापना, से संबंधित सभी कार्य के लिए प्रशासकीय विभाग विधि विभाग है। माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के संबंध में प्रशासकीय विभाग सामान्य प्रशासन विभाग है। इस शाखा द्वारा न्यायिक प्रशासन से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सेवा शर्तों से संबंधित सभी कार्य किये जाते हैं। न्यायिक अधिकारियों की पेंशन से संबंधित कार्यवाही भी की जाती है। इस शाखा में पदस्थ न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या न्यायाधीशों के पद निर्माण, भर्ती में नियुक्ति, प्रशिक्षण, प्रत्यावर्तन, प्रवर्तन, निलंबन, सेवाकाल में वृद्धि, सेवानिवृत्ति, पुर्ननियुक्ति, वेतननिर्धारण, गे्रच्युटी, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति हेतु पदस्थापना आदि के कार्य भी किये जाते हैं ।
  • न्याय प्रशासन में होने वाले देयक से संबंधित सभी कार्य भी इस शाखा में होते हैं। न्यायाधीशों के विरूद्ध प्रस्तुत वाद या याचिका प्रस्तुत होने पर इसमें कार्यवाही, उपभोक्ता फोरम से संबंधित कार्य, एडमिनिस्ट्रेटर जनरल एवं आफिशियल ट्रस्टी से संबंधित कार्य भी होते हैं ।
  • पूरे प्रदेश के न्यायालयों में कार्य व्यवस्थाओं के संबंध में बजट कार्य इसी शाखा में होता है। यह शाखा माननीय उच्च न्यायालय, माननीय मुख्यमंत्री, माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा केन्द्र शासन के बीच सभी प्रकार के समन्वय का कार्य भी करती है ।
  • माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति के पेंशन, चिकित्सा सुविधायें, भविष्य निधि से संबंधित कार्य, आवास व्यवस्था से संबंधित कार्यवाही, अन्तर्राष्ट्रीय परिषद् तथा मुख्यमंत्री एवं मुख्य न्यायाधिपति के सम्मेलन में लिये गये निर्णयों का क्रियान्वयन भी इसी शाखा में होता है ।

न्यायिक शाखा-दो:

  • उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय, जिला न्यायालय, विधि अधिकारियों की नियुक्ति, नोटरी से संबंधित प्रकरण, पैनल लायर्स की नियुक्ति, लोक अभियोजक/अतिरिक्त लोक अभियोजक की नियुक्ति, विधि विभाग द्वारा प्रशासित अधिनियम एवं नियम, तथा इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872 के तहत मैरिज लाइसेंस, विधिक सेवा प्राधिकरण का कार्य संपादित होता है ।
  • प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में शासन की ओर से उपस्थित होने वाले अभिभाषकों की नियुक्ति का मुख्य कार्य है जिसमें दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 24, के प्रावधान अनुसार शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति का प्रावधान है। वैसे शासकीय अधिवक्ता की नियुक्ति के संबंध में विधि विभाग नियमावली के प्रथम भाग में उल्लेख है, जिसके अनुसार उसकी कंडिका 150 में उल्लेखित विधि से प्रस्ताव प्राप्त होते हैं तथा उसके अनुसार शासन की ओर से उनकी नियुक्ति की जाती है। इसी तरह वर्तमान में विशेष न्यायालयों में उपस्थित होने हेतु भी शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्तियां की जाती हैं। इस संबंध में जिस अधिकरण या प्राधिकरण के सम्मुख अभिभाषक को उपस्थित होना है उससे संबंधित विभाग अभिभाषक की नियुक्ति हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं तथा उन प्रस्तावों पर विचार होकर नस्ती प्रशासकीय अनुमोदन हेतु विधि विभाग के माननीय मंत्री महोदय के सम्मुख जाती है तथा माननीय मंत्रीजी के आदेश से व अनुमोदन से इस संबंध में नियुक्ति की जाती है ।
  • इसी तरह इस विभाग में नोटरी अधिनियम 1952 के प्रावधानानुसार नोटरी की नियुक्ति का भी उल्लेख है। नोटरी की नियुक्ति के लिए संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश को आवेदन पत्र प्रस्तुत किये जाते हैं तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रस्तुत आवेदन पत्रों की सूची को प्रकाशित करता है तथा उस पर आपत्ति आमंत्रित करता है तथा निराकरण उपरांत एक पैनल विधि विभाग को भेजते हैं। विधि विभाग में प्रस्ताव आने पर विचार कर माननीय मंत्री महोदय से प्रशासकीय स्वीकृति उपरान्त आदेश पारित किये जाते हैं ।
  • इस विभाग द्वारा विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में विधि तथा न्यायिक प्रशासन से संबंधित प्रश्न उपस्थित होने पर उनके उत्तरों को प्रस्तुत करने का दायित्व है तथा विधानसभा में संपादित होने वाली कार्यवाहियों के लिए भी यही शाखा उत्तरदायी है ।
  • विधि और विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत माध्यस्थम अधिकरण तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण भी प्रशासित हैं तथा इनका प्रशासकीय विभाग भी विधि विभाग है और विधि विभाग में इनसे संबंधित कार्य इसी शाखा में संपादित किये जाते हैं ।

प्रारूपण शाखा: समस्त विधेयकों एवं अध्यादेशों का परिमार्जन एवं परीक्षण, राज्यपाल एवं राष्ट्रपति के एसेंट तथा केन्द्र शासन से पत्राचार एवं राज्य शासन के विचार जानने हेतु भेजे गये केन्द्रीय विधेयक एवं लोक प्राधिकारियों के दायित्व से संबंधित तथा अन्य मामलों से संबंधित प्रकरण का कार्य संपादित होता है ।

विधीक्षा शाखा: विधिक्षा शाखा में प्रत्यायोजित विधान से संबंधित कार्य होता है। समस्त विभागों से संबंधित अधीनस्थ नियमों, आदेशों, उपनियमों, अधिसूचनाओं, उपविधियों एवं विनियमों के प्रारूप के परिमार्जन का कार्य संपादित किया जाता है । प्रकाशित नियमों का संहिताकरण भी इस शाखा द्वारा किया जाता है ।

अनुवाद शाखा: समस्त विधेयकों एवं अध्यादेशों, नियमों, उपनियमों, अधिसूचनाओं का हिन्दी अनुवाद कार्य संपादित होता है। अनुवाद शाखा में अधिनियमों/नियमों/ विनियम/आदेश/विधि/उपविधि के प्रारूपों का हिन्दी अनुवाद किया जाता है। प्रशासकीय विभागों द्वारा नियमों/अधिनियमों के अंग्रेजी व हिन्दी प्रस्तावित/प्रारूप परिमार्जन हेतु इस विभाग को भेजे जाते है। जिनमें से अंग्रेजी प्रारूपों का परीक्षण क्रमशः इस विभाग की विधिक्षा शाखा एवं प्रारूपण शाखा द्वारा किए जाते हैं तत्पश्चात् अंग्रेजी प्रारूप के हिन्दी अनुवाद हेतु नस्ती अनुवाद शाखा को अंकित कर दी जाती है, अनुवाद पश्चात् नस्ती पुनः संबंधित शाखाओं को वापस कर दिए जाते हैं। इस शाखा का प्रशासकीय विभागों से सीधा संबंध नहीं है।

मत शाखा: समस्त विभागों से प्राप्त विभिन्न प्रकार के प्रकरणों पर परीक्षण कर मत दिया जाता है एवं आरोप पत्र अभिकथन पत्रक का भी परीक्षण किया जाता है। मत शाखा द्वारा प्रशासकीय विभाग से प्राप्त प्रकरणों में विधिक बिन्दुओं पर अभिमत व्यक्त किए जाने के साथ ही प्राप्त अनुबंध, निविदा, एम.ओ.यू. एवं विभाग जांच से संबंधित प्रारूप का परिमार्जन भी किया जाता है।

याचिका शाखा: उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय, अधिकरण के निर्णय में याचिका/विशेष अनुमति याचिकायें प्रस्तुत करने से संबंधित प्रशासकीय विभागों को मत, आदेश का कार्य एवं याचिकाओं में प्रतिरक्षण, अवमानना प्रकरण में प्रतिरक्षण एवं शासन के निर्णय पर माननीय उच्च न्यायालय में केविएट प्रस्तुत करने की अनुमति तथा अन्य विभागों से प्राप्त पत्रों की प्रस्तुति माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय /राज्य के बाहर के प्रकरण/माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण, प्रशासकीय विभाग के माध्यम से कार्यवाही हेतु इस विभाग को प्राप्त प्रकरणों में प्रतिरक्षण का कार्य संपादित होता है।

आपराधिक शाखा:

  • प्रदेश तथा प्रदेश के बाहर के दांडिक न्यायालयोें/उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में छ.ग. शासन की ओर से तथा उसके विरूद्ध प्रस्तुत आपराधिक प्रकरणों एवं अपीलों से संबंधित समस्त कार्य।
  • उक्त प्रकरणों से उत्पन्न अवमानना प्रकरण।
  • दांडिक प्रकरणों में शासकीय कर्मचारियों का शासन के व्यय पर प्रतिरक्षण।
  • आपराधिक प्रकरण वापसी से संबंधित संपूर्ण प्रदेश का कार्य।
  • विभिन्न दांडिक निर्णयों के विरूद्ध उच्च न्यायालय, बिलासपुर में की जाने वाली अपीलें ।
  • उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आपराधिक अपील एवं विशेष अनुमति याचिकाओं पर प्रतिरक्षण कार्यवाही ।

अभियोजन शाखा:

  • बंदियो से संबंधित दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 तथा संविधान अनुच्छेद 161 के अंतर्गत दया याचिका।
  • 14 वर्षीय नियम प्रकरण मंत्रणा मण्डल के संबंधित समस्त कार्य।
  • एंटी करप्शन ब्यूरो एवं राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से प्राप्त अभियोजन स्वीकृति के प्रकरण।
  • प्रशासकीय विभाग द्वारा विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत प्रस्तुत अभियोजन स्वीकृति से संबंधित कार्य।
  • धारा 129-130, 131 दण्ड प्रक्रिया संहिता के राज्य शासन से संबंधित कार्य।
  • गृह विभाग द्वारा अनुमोदित प्रकरणों की वापसी।
  • धारा 153-क 295-क, 295-ब, धारा 505 (1) (ख) (ग) (2) (3) भारतीय दण्ड संहिता से संबंधित अभियोजन स्वीकृति के प्रकरण।

सिविल शाखा: सिविल शाखा में माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के समक्ष (प्रथम अपील, द्वितीय अपील, सिविल अपील प्रकरण) छत्तीसगढ़ माध्यस्थम अधिकरण रायपुर, राजस्व मंडल छत्तीसगढ़ बिलासपुर (सर्किट कोर्ट रायपुर) राज्य के समस्त जिला एवं श्रम न्यायालयों तथा राज्य विवाद उपभोक्ता प्रतितोषण के समक्ष लंबित प्रकरणों में प्रतिरक्षण की कार्यवाही की जाती है। विभिन्न प्रकरणों में इस विभाग का अभिमत, जिला तथा श्रम न्यायालयों, छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल, राज्य औद्योगिक न्यायालय द्वारा पारित आदेशों/ अधिनिर्णयों/अवार्डों के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका /अपील एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका प्रस्तुत करने की अनुमति के प्रकरण तथा अन्य विभागों/कार्यालयों से प्राप्त पत्रों की प्रस्तुति /प्रतिरक्षण का कार्य संपादित होता है।

बजट शाखा : बजट शाखा में विधि विभाग का समस्त बजट, उच्च न्यायालय का बजट, जिला सत्र न्यायालयों का बजट, निर्वाचन शाखा का बजट एवं आदिवासी विकास योजनाओं एवं केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित योजनाओं के अंतर्गत संबंधित कार्य संपादित किया जाता है।

पुस्तकालय शाखा: केन्द्रीय अधिनियमों एवं अध्यादेशों व नियमों का पुर्नप्रकाशन संबंधी कार्य संपादित किया जाता है ।

ग्राम न्यायालय: इस शाखा में ग्राम न्यायालय से संबंधित समस्त कार्य संपादित किया जाता है ।

स्थापना शाखा: इस शाखा में विधि विभाग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवा संबंधित कार्य, पदों का निर्माण एवं विभाग के स्थापना से संबंधित समस्त कार्य संपादित किया जाता है । विधि और विधायी कार्य विभाग का सेटअप निम्नानुसार है:-

Sno.Post NameNo. of PostFilled PostVacant Post
1Principal Secretary110
2Additional Secretary330
3Deputy Secretary541
4Under Secretary770
5Accounts Officer110
6Staff Officer110
7Assistant Director (Translate)110
8Section Officer817
9Personal Secretary101
10Assistant Account Officer101
11Assistant Grade I1495
12Assistant Grade II12120
13Assistant Grade III28820
14Protocol Assistant110
15Stenographer (Hindi)770
16Stenographer (English)330
17Steno Typist615
18Chief Translator220
19Translator651
20Librarian110
21Assistant Librarian101
22Accountant101
23Computer Operator220
24Driver853
25Daftari413
26Peon25241
Total15010050

लेखा शाखा:

  • विधि विभाग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा लोक अभियोजक कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते आदि का भुगतान किया जाता है।
  • इस शाखा में समस्त प्रकार के देयकों की राशि कोषालय से आहरित कर भुगतान किया जाता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त शासकीय अधिवक्ता एवं महत्वपूर्ण प्रकरणों में नियुक्त अन्य अधिवक्ताओं को इस विभाग की सेवा शर्तों के अधीन फीस का भुगतान किया जाता है।

मैनुअल-2

वर्तमान में विभाग के भारसाधक मंत्री तथा अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की शक्तियां एवं कर्तव्य

  • विधि मंत्री
  • प्रमुख सचिव तथा विधि परामर्शी
  • अतिरिक्त सचिव तथा अतिरिक्त विधि परामर्शी
  • उप सचिव तथा उप विधि परामर्शी
  • अवर सचिव तथा सहायक विधि परामर्शी
  • अनुभाग अधिकारी
  • सहायक विभिन्न श्रेणी

अधिकारियों की शक्तियां एवं कर्तव्य निम्नानुसार है:-

विधि मंत्री: विधि और विधायी कार्य विभाग के प्रमुख विधि मंत्री होते हैं। विधि परामर्शी एवं विधि विशेषज्ञ के रूप में किये जाने वाले कार्य के सिवाय सभी प्रशासकीय निर्णय विधि मंत्री द्वारा लिये जाते हैं। शासकीय अभिभाषक की नियुक्ति, नोटरी की नियुक्ति एवं उनके कार्यकाल का नवीनीकरण, आपराधिक प्रकरण की वापसी, दया याचिका, विभागीय संरचना, विभागीय बजट, विधानसभा संबंधी कार्य, न्यायालयों की स्थापना के कार्य में प्रशासकीय निर्णय विधि मंत्री द्वारा लिये जाते हैं ।

प्रमुख सचिव: प्रमुख सचिव विभाग के विभागाध्यक्ष एवं शासन के विधि परामर्शी तथा पदेन महाप्रशासक आॅफिशियल ट्रस्टी एवं प्रोक्टर होते हैं। विभाग का विभागीय नियंत्रण प्रमुख सचिव के पास होता है। विधि विभाग विधि संबंधी विशेषज्ञ विभाग में एवं राज्य के विभिन्न विधि संबंधी पहलुओं का निराकरण प्रमुख सचिव स्तर पर किया जाता है। राज्य शासन के एवं केन्द्र शासन के कुछ विभागों को विधि संबंधी परामर्श देते हैं। कार्यपालिका के अन्य विभागों के ड्राफ्टिंग, एग्रीमेंट एवं अन्य दस्तावेजों के संबंध में परामर्श देते हैं। शासन के सिविल एवं दांडिक प्रकरण जिसमें शासन पक्षकार हैं, उसके सुचारू रूप से संचालन का देखरेख करते है। सिविल प्रकरण में कोर्ट आॅफ अवाडर््स से संबंधित हो तो उस संबंध में परामर्श देते हैं ।

प्रमुख कार्य निम्नानुसार है:

  • केन्द्र एवं अन्य राज्य सरकारों से पत्र व्यवहार के महत्वपूर्ण मामलें।
  • सभी प्रकरण जिनमें महाधिवक्ता की राय ली जाना ।
  • सभी प्रकरण जिनमें मंत्री/मुख्यमंत्री जी के आदेश आवश्यक हो ।
  • राज्यपाल/कुलाधिपति/मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से प्राप्त मत के प्रकरण ।
  • संवैधानिक निर्देश ।
  • विधानसभा के संबंध में मत हेतु प्राप्त सभी प्रकरण ।
  • विधिक विलेखों के परीक्षण तथा प्रारुपण संबंधी महत्वपूर्ण प्रकरण ।
  • ऐसे महत्वपूर्ण प्रकरण जो संबंधित अतिरिक्त सचिवों द्वारा प्राथमिकता से अथवा जिसे प्रस्तुत किये जाने की अपेक्षा प्रमुख सचिव करें ।
  • स्थापना शाखा के महत्वपूर्ण प्रकरण जो अतिरिक्त सचिव द्वारा अंकित किए जावे ।
  • न्यायिक शाखा-1 एवं 2 के महत्वपूर्ण प्रकरण ।
  • विभाग का कोई भी प्रकरण जिसका प्रमुख सचिव स्वयं परीक्षण करना चाहें ।
  • विभाग के समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों के कार्य का निरीक्षण ।
  • विधि विभाग से संबंधित अन्य कार्य जो अन्य किसी को आबंटित न हो ।
  • प्रारुपण, विधीक्षा तथा अनुवाद शाखा से संबंधित समस्त कार्य ।
  • सभी विभागों से प्राप्त मत के प्रकरण ।
  • पुस्तकालय संबंधी समस्त कार्य ।

अतिरिक्त सचिव: अतिरिक्त सचिव राज्य शासन के विधि विभाग के पदेन अपर सचिव होते हैं जो प्रमुख सचिव विधि परामर्शी को सहायता करते हैं। सिविल प्रकरण जो शासन से संबंधित है, उससे संबंधित सभी प्रकरणों का निराकरण करते हैं ।

प्रमुख कार्य निम्नानुसार हैं:

  • बजट
  • अभियोजन स्वीकृति के प्रकरण ।
  • दाण्डिक एवं व्यवहार अपील एवं पुनरीक्षण एवं इनसे संबंधित अभिमत एवं आपराधिक शाखा का समस्त कार्य ।
  • विधानसभा संबंधी कार्य ।
  • अधिकारी/कर्मचारी के मोटर/स्कूटर, भवन निर्माण आदि तथा 50 हजार रुपये से नीचे भविष्य निधि के अग्रिम ।
  • ग्राम न्यायालय ।
  • बंदियों से संबंधित दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 तथा संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत दया याचिका तथा 14 वर्षीय बंदियों के नियम प्रकरण से संबंधित कार्य ।
  • फास्ट ट्रेक कोर्ट संबंधी समस्त कार्य ।
  • अभियोजन वापसी प्रकरण ।
  • सिविल शाखा का समस्त कार्य ।
  • उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा सभी अधिकरणों हेतु प्रतिरक्षण आदेश।
  • निर्वाचन शाखा का कार्य ।
  • क्रिश्चियन मैरिज लाइसेंस ।
  • विधि विभाग द्वारा प्रशासित अधिनियम एवं नियम ।
  • वित्त आयोग ।
  • शासकीय योजना ।
  • याचिकाएं संबंधी कार्य ।
  • केन्द्र एवं राज्य सरकारों से पत्र व्यवहार ।
  • महाधिवक्ता की राय संबंधी प्रकरण ।
  • मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से संबंधित माॅनिटिरिंग व संबंधित समस्त कार्य ।
  • विधायी समिति एवं मंत्रणा मंडल संबंधी कार्य
  • सचिव, विधि द्वारा समय-समय पर सौपे गये अन्य कार्य ।
  • विभाग के समस्त रुपये 15,000/- तक के देयक के भुगतान संबंधी स्वीकृति ।
  • राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव से प्राप्त पत्राचार के प्रकरण ।
  • शिकायत ।
  • महाधिवक्ता फीस एवं महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी एवं उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं की नियुक्ति संबंधी समस्त कार्य ।
  • अवमानना प्रकरण ।
  • गबन के प्रकरण ।
  • उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों की स्थापना से संबंधित समस्त कार्य ।
  • न्यायाधीशों के लिए आवास एवं भवनो का निर्माण संबंधी कार्य ।
  • उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों/कर्मचारियों से संबंधित प्रकरण ।
  • विशेष न्यायालयों का गठन ।
  • विधिक सेवा प्राधिकरण का कार्य ।
  • हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का कार्य ।
  • माध्यस्थम अधिकरण का कार्य ।
  • पुस्तकालय संबंधी कार्य ।
  • निर्वाचन ।
  • विधि आयोग एवं अन्य आयोग का समस्त कार्य ।
  • आरोप पत्र एवं अभिकथन का परीक्षण
  • नोटरी एवं लोक अभियोजक/अतिरिक्त लोक अभियोजक/विशेष लोक अभियोजक एवं पैनल लायर्स संबंधी कार्य ।
  • द्वितीय श्रेणी अधिकारियों एवं इससे उपर के अधिकारियों के अवकाश स्वीकृति प्रकरण एवं स्थापना से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य एवं महाधिवक्ता स्थापना का कार्य।
  • विधि विभाग से संबंधित अन्य कार्य जो अन्य किसी को आवंटित न हो ।
  • प्रमुख सचिव/सचिव विधि महोदय की अनुपस्थिति में सभी आवश्यक कार्य।

उप सचिव के प्रमुख कार्य निम्नानुसार हैं:

  • विधेयक एवं अध्यादेश जैसे संबंधित ड्राफ्टिंग, नियम, उपनियम, अधिसूचना का जांच परिमार्जन आदि उनके द्वारा किया जाता है और उससे संबंधित सभी मामलों का निराकरण किया जाता है एवं प्रमुख सचिव के कार्य में सहायता करते हैं ।
  • विधि विभाग स्थापना संबंधी समस्त कार्य ।
  • प्रतिरक्षण संबंधी कार्यवाही ।
  • राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव से प्राप्त पत्राचार एवं मत के प्रकरण ।
  • सभी प्रकार की याचिकाएं संबंधी कार्य ।
  • विधि विभाग द्वारा प्रशासित अधिनियम एवं नियम।
  • नोटरी एवं लोक अभियोजक/अतिरिक्त लोक अभियोजक/विशेष लोक अभियोजक एवं पेनल लायर्स संबंधी कार्य ।
  • विधानसभा प्रश्न तथा उससे संबंधित कार्य ।
  • शिकायत ।
  • मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव से प्राप्त पत्र एवं निर्देश तथा माॅनिटरिंग संबंधी कार्य ।
  • क्रिश्चियन मैरिज लाइसेंस ।
  • महाधिवक्ता फीस एवं महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी एवं उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं की नियुक्ति संबंधी समस्त कार्य ।
  • अवमानना प्रकरण।
  • गबन के प्रकरण।
  • सिविल शाखा का समस्त कार्य ।
  • तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृति संबंधी कार्य।
  • विधायी से संबंधित समस्त कार्य ।
  • विधि विभाग से संबंधित अन्य कार्य जो अन्य किसी को आवंटित न हो।
  • सचिव एवं अतिरिक्त सचिव, विधि द्वारा समय-समय पर सौंपे गये अन्य कार्य।
  • उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित समस्त कार्य ।
  • न्यायाधीशों के लिए आवास एवं न्यायालय भवनों का निर्माण ।
  • उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संबंधित प्रकरण।
  • विशेष न्यायालयों का गठन ।
  • वित्त आयोग ।
  • शासकीय योजना ।
  • मत शाखा का समस्त कार्य ।
  • बजट संबंधी समस्त कार्य ।
  • ग्राम न्यायालय का समस्त कार्य ।
  • विधिक सेवा प्राधिकरण
  • हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का कार्य ।
  • माध्यस्थम अधिकरण का कार्य ।
  • बंदियों से संबंधित दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 तथा संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत दया याचिका तथा 14 वर्षीय बंदियों के नियम प्रकरण ।
  • प्रकरण वापसी से संबंधित समस्त कार्य ।
  • फास्ट ट्रेक कोर्ट का समस्त कार्य ।
  • मंत्रणा मंडल से संबंधित समस्त कार्य ।
  • स्टेट बार कौंसिल से संबंधित समस्त कार्य ।
  • प्रमुख सचिव एवं अतिरिक्त सचिव, विधि द्वारा समय-समय पर सौंपे गये अन्य कार्य ।
  • विधि आयोग ।
  • प्रारुपण शाखा का समस्त कार्य
  • अनुवाद ।
  • विधीक्षा से संबंधित समस्त कार्य ।
  • कोडीफिकेशन, कन्वेसिंग
  • पुस्तकालय संबंधी कार्य ।
  • आपराधिक पुर्नरीक्षण प्रकरण तथा अपील
  • दाण्डिक तथा इनसे संबंधित अभिमत
  • निर्वाचन ।
  • आरोप पत्र एवं अभिकथन का परीक्षण
  • अन्य आयोगों का कार्य ।
  • शासकीय आयोग ।
  • अभियोजन शाखा से संबंधित समस्त कार्य ।
  • प्रमुख सचिव एवं अतिरिक्त सचिव,विधि द्वारा समय-समय पर सौंपे गये अन्य कार्य ।

अवर सचिव के कार्य निम्नानुसार हैं:

  • अवर सचिव उप सचिव के कार्य में सहायता करेंगे साथ ही साथ कर्मचारियों की व्यवस्था एवं अनुशासन तथा उन पर नियंत्रण रखना और उनके कामकाज को ठीक ढंग से चलाये जाने के लिए जिम्मेदार होंगे ।
  • प्रमुख सचिव के आदेश से अनुभाग अधिकारी तथा लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की जिसमें निजी सहायक और शीघ्रलेखक भी शामिल है, भर्ती, चरित्र संबंधी जांच-पड़ताल, नियुक्ति, तबादला, पदोन्नति, पदावनति तथा प्रतिनियुक्ति से संबंधित सभी मामलों पर कार्यवाही करेंगे ।
  • सचिवालयीन कर्मचारियों के पदक्रम सूची तैयार कर प्रसारित करना ।
  • पदों के निर्माण तथा समाप्ति, वेतन निर्धारित उससे संबंधित विषय, वेतन बढ़ाने की मंजूरी के संबंध में कार्यवाही करना ।
  • लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की छुट्टी संबंधी आवेदन पत्र पर कार्यवाही करना।
  • सभी शाखाओं में उपस्थिति की जांच करना और हमेशा देरी से आने वाले कर्मचारियों के मामले में ध्यान दिलाना ।
  • सेवा पुस्तिका, छुट्टी का हिसाब रखना, सेवा पुस्तिका में लिखी हुई बातों को प्रमाणित करना, सेवा विवरणों का जांच करना उन्हें सही प्रमाणित करना ।
  • सजाओं, अभ्यावेदनों, अपीलों और स्मरण पत्रों के संबंध में कार्यवाही करना।
  • लिपिक वर्ग के कर्मचारियों के चरित्र तथा अल्पकालिक पंजियों को अपने कब्जे में रखना और इस बात का ध्यान में रखना कि अवर सचिवों को प्रत्येक वर्ष के नियत दिनांक को और किसी सचिव/उपसचिव/अवर सचिव के छुट्टियां तबादले पर जाते समय प्राप्त आवेदनों को समय पर भी प्रस्तुत किया जाना ।
  • ऐसे लिपिक के संबंध में ध्यान आकर्षित करना जो कर्जदार या दिवालिया हो या जिन्होंने दूसरों के लिए जमानत दी हो और किसी लिपिक को स्थायी सेवा में लिये जाने के पहले यह समाधान कर लें कि वह कर्मचारी कर्जदार तो नहीं है ।
  • सामान्यतः कार्यालय के संबंध में जारी किये गये सभी आदेश की स्थायी आदेश पत्रक के रूप में रखना ।
  • सामान्य भविष्य निधि, सवारी, सायकिल तथा मकान बनाने के लिए रूपये एवं सामान्य भविष्य निधि से अंतिम रूप से रूपये निकालने से संबंधित आवेदन पत्र पर कार्यवाही करना ।
  • लिपिक वर्ग के कर्मचारियों से संबंधित पेंशन और गेच्युटी के मामले पर कार्यवाही करना ।
  • कार्यालय के लेखन सामग्री, फर्नीचर और फार्म, मांग पत्र तैयार करने की व्यवस्था करना और जो लेखन सामग्री प्राप्त हो उसको लेना और उसकी जांच करना ।
  • प्रतिदिन आने वाले डाक को लेना और उसे शाखाओं में शीघ्र बंटवाना । विधानसभा सत्र की अवधि में प्रतिदिन विधानसभा के डाक लेना और शीघ्र बंटवाने की व्यवस्था करना ।
  • सचिवालय के चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को वर्दी देना ।
  • टाइप राइटर के कामकाज की भलीभांति देखरेख करना। समय-समय पर उन्हें सुधरवाना ।
  • महालेखापाल का वार्षिक स्थापना विवरण भेजना एवं अन्य कर्तव्यों का पालन करना जो समय-समय पर उच्च अधिकारियों द्वारा सौंपी जाये ।

अनुभाग अधिकारियों की शक्तियां एवं कर्तव्य:

  • अनुभाग में नियंत्रण और अनुशासन बनाए रखना, कार्यालय में देर से आने वाले कर्मचारियों का उपस्थिति रजिस्टर में रिकार्ड रखना तथा रिपोर्ट करना ।
  • शासकीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार प्रकरणों को प्रस्तुत करवाना ।
  • कार्यालयीन समय में कक्ष से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर नजर रखना और रिपोर्ट करना ।
  • कक्ष के किसी कर्मचारी के छुट्टी पर जाने पर उसके टेबिल के कार्य की व्यवस्था करवाना ।
  • कक्ष के कर्मचारियों के कार्यभार में सद्भाव से तालमेल बनाए रखना ।
  • तत्काल और समय-सीमा के प्रकरण तुरन्त प्रस्तुत कराना, उन्हें देखना चाहिए कि निपटारे के किसी भी स्टेज पर ऐसे प्रकरणों में देर न हो । प्रकरण प्रस्तुत होने के बाद उसकी वापसी का इंतजार करना चाहिए और यदि कक्ष से वह नस्ती वापस नहीं आती है तो अवर सचिव के ध्यान में लाना चाहिए । ऐसे प्रकरण स्वयं ले जाकर प्रस्तुत करना चाहिए ।
  • विचाराधीन पत्र पर जो कार्यवाही होना है, उस कार्यवाही के लिए सुझाव देना ।
  • जटिल और महत्वपूर्ण विषयों पर टीप स्वयं प्रस्तुत करना ।
  • निर्धारित साप्ताहिक या मासिक रिपोर्ट भेजना ।
  • कार्यालय द्वारा तैयार की गई प्रथम टीप की जांच करना कि उसमें पूर्ण तथ्य दिए हैं या नहीं तथा उच्चाधिकारियों को अपनी टीका या सुझाव देना।
  • कक्ष में प्राप्त डाक का वितरण करना ।
  • प्रत्येक सप्ताह में आवक रजिस्टर का निरीक्षण करना और उसमें अपने हस्ताक्षर करना ।
  • अन्य विभागों/कक्षों में भेजी गई नस्तियों और पत्रों के विषय में स्मरण पत्र भेजना।
  • लंबित प्रकरणों की साप्ताहिक सूची बनवाकर प्रस्तुत करना ।
  • सहायक की डायरी तथा पेंडिंग फाइल रजिस्टर की जांच करना ।
  • रूटिन प्रकार के पत्र व्यवहार के प्रारूप अनुमोदित करने तथा स्वच्छ प्रतियों में हस्ताक्षर करना ।
  • निपटाए और लंबित प्रकरणों के स्टेटमेन्ट भिजवाना ।
  • यह देखना कि कोई विचाराधीन पत्र या प्रकरण बिना कार्यवाही किए हुए छूट न जावे ।
  • यह देखना कि कोई प्रकरण विलंबित स्टेटमेंट में दर्शाने से तो नहीं छूट गया है।
  • इन्स्पेक्शन रिपोर्ट पर कार्यवाही, त्रुटियों को पूरा करवाना ।
  • रिकार्ड के विनष्टीकरण के आदेश देना ।
  • तीन वर्ष से अधिक समय की अभिलेखिक नस्तियां अभिलेखागार में भिजवाना।
  • जावक लिपिक के स्टेम्प रजिस्टर की जांच करना ।
  • कक्ष में पदस्थ अधीनस्थ कर्मचारियों के आकस्मिक अवकाश, ऐच्छिक अवकाश स्वीकृत करना ।

मैनुअल-3

विनिश्चय करने की प्रक्रिया में पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसमें पर्यवेक्षण और उत्तरदायित्व के माध्यम सम्मिलित हैं:-

डाक प्राप्त होने पर साधारण प्रक्रिया:

  • डाक प्राप्त होने पर अवर सचिव डाक को प्रमुख सचिव महोदय के समक्ष प्रस्तुत करते हैं जिसे संबंधित उप सचिव को दिखाकर आवक शाखा में पंजी होकर संबंधित अनुभाग अधिकारी को वितरित की जाती है। वितरण होने पर संबंधित शाखा का अनुभाग अधिकारी अपने लिपिक को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित करते हैं ।
  • निर्देशित होने पर संबंधित लिपिक ये देखेगा कि उस प्रकरण से संबंधित नस्ती चालू है या नहीं अगर चालू है तो उस नस्ती के साथ प्रस्तुत करेगा अन्यथा नस्ती पंजीबद्ध कर अनुभाग अधिकारी को प्रस्तुत करेगा ।
  • अनुभाग अधिकारी नस्ती पर टीप संबंधित तथ्यों को संक्षिप्त में,सुविधाजनक रूप से, पूर्व इतिहास बतलाते हुए यदि हो तो वे तथ्य बतलाये जायें जिन पर निर्णय लिया जाना है, अवर सचिव के समक्ष प्रस्तुत करेंगे ।
  • अवर सचिव अपने टीप लिखकर उप सचिव के समक्ष नस्ती प्रस्तुत करेंगे।
  • उप सचिव अपना अभिमत लिखकर अतिरिक्त सचिव के समक्ष नस्ती प्रस्तुत करेंगे ।
  • अतिरिक्त सचिव नस्तियों पर अपना निर्णय देंगे एवं जो प्रकरण महत्वपूर्ण है उन्हें प्रमुख सचिव महोदय के समक्ष अपने टीप के साथ प्रस्तुत करेंगे ।
  • प्रमुख सचिव महोदय दिये गये टीप अनुसार अपना अनुमोदन देंगे या अन्य निर्देश एवं मार्गदर्शन देंगे जिसके आधार पर पुनः कार्यवाही किया जाकर प्रमुख सचिव के समक्ष नस्ती प्रस्तुत होगा जिसे वे अनुमोदन करेंगे। जिन नस्तियों में विधि मंत्रीजी या माननीय मुख्यमंत्रीजी या राज्यपाल महोदय के अनुमोदन की आवश्यकता हो, तो ऐसे प्रकरण प्रमुख सचिव के हस्ताक्षर होने के पश्चात उचित माध्यम से पे्रषित किये जाते है और उस पर विधि मंत्रीजी, माननीय मुख्यमंत्रीजी या राज्यपाल महोदय का अनुमोदन प्राप्त किया जाता है ।
  • अनुमोदन पश्चात संबंधित नस्ती अनुभाग अधिकारी के पास जावेगी जिसे अनुभाग अधिकारी अनुमोदित आदेशानुसार लिपिक को कार्यवाही करने हेतु निर्देशित करेंगे एवं कार्यवाही संपूर्ण होने के पश्चात् आवश्यक हस्ताक्षर प्राप्त कर नस्ती संबंधित विभाग को भेजी जायेगी।

दांडिक प्रकरणों में प्रक्रिया:

  • राज्य में स्थापित किसी दंड न्यायालय के द्वारा दिये गये आदेश की जानकारी राज्य शासन (विधि विभाग) को प्राप्त होने पर उस पर अग्रिम कार्यवाही इस शाखा द्वारा की जाती है। ऐसे मामले संचालक लोक अभियोजक अथवा जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पे्रषित की जाती है या राज्य शासन के किसी अन्य विभागों के द्वारा कार्यवाही किये जाने का प्रस्ताव विभाग को पे्रषित किया जाता है। मामले से संबंधित पक्षकार की ओर से सीधे आवेदन प्रस्तुत करने के आधार पर अथवा आदेश की जानकारी होने पर स्वपे्ररणा के आधार पर इस विभाग द्वारा कार्यवाही प्रारंभ की जाती है। सामान्यतः किसी भी आपराधिक मामलों में पारित आदेश/निर्णय के विरूद्ध अपील/पुनरीक्षण/धारा 482 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कार्यवाही किये जाने का प्रस्ताव जिला स्तर के न्यायालयों के संबंध में सहायक लोक अभियोजक/उप संचालक अभियोजन/अतिरिक्त लोक अभियोजक/लोक अभियोजक/जिला मजिस्ट्रेट की ओर से प्रस्ताव पे्रषित किये जाते हैं ।
  • प्रेषित प्रस्ताव विधि विभाग के आवक शाखा को प्राप्त होने पर आवक शाखा द्वारा आपराधिक शाखा से संबंधित प्रस्ताव इस शाखा के अनुभाग अधिकारी को भेजे जाते हैं। अनुभाग अधिकारी ऐसे प्रस्तावों को अपने अधीनस्थ कार्यरत सहायक ग्रेड-एक या ग्रेड-दो को देते हैं जो ऐसे प्रस्तावों का पंजीयन कर अपील अथवा पुनरीक्षण प्रस्तुत करने की परिसीमा काल संगणित कर उसे अनुभाग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करते हैं ।
  • संबंधित लिपिक और अनुभाग अधिकारी प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रथम दृष्टया इस तथ्य पर जांच करते हैं प्रस्ताव किसके द्वारा भेजा गया है, प्रस्ताव के साथ निर्णय, आदेश की प्रमाणित प्रति तथा साक्षियों के कथन की प्रमाणित प्रति संलग्न है या नहीं। यदि उक्त प्रस्ताव में संलग्न नहीं है तो इसका उल्लेख नस्ती में किया जाता है।
  • प्रस्ताव से संबंधित नस्ती अनुभाग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कये जाने पर अनुभाग अधिकारी दी गई जानकारी तथा परिसीमाकाल की सत्यता की जांच कर अपने संक्षिप्त रिपोर्ट के साथ नस्ती परीक्षण के लिए उप सचिव के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है ।
  • उप सचिव जो कि न्यायिक सेवा से संबंधित अधिकारी होता है उनके द्वारा उक्त प्रस्ताव का परीक्षण निर्णय, आदेश की प्रमाणित प्रति, साक्षियों अथवा दस्तावेज की प्रतियों, मामले के संचालक लोक अभियोजक अथवा जिला मजिस्ट्रेट के अभिमत के आधार पर किया जाता है तथा आधारों का उल्लेख करते हुए अपना अभिमत नस्ती में दिया जाता है तथा नस्ती अतिरिक्त सचिव जो न्यायिक अधिकारी होते हैं को अग्रेषित किया जाता है ।
  • अतिरिक्त सचिव यदि उप सचिव के अभिमत से संतुष्ट होते हैं तो उस अभिमत का अनुमोदन करते हैं और नस्ती पुनः संबंधित शाखा के अनुभाग अधिकारी को वापस कर दिया जाता है। यदि अतिरिक्त सचिव द्वारा दिया गया अभिमत उप सचिव से भिन्न है तो नस्ती प्रमुख सचिव विधि के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और प्रमुख सचिव द्वारा जिस मत का अनुमोदन किया जाता है उसके अनुसार आगे कार्यवाही की जाती है।
  • प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर यदि अपील अथवा पुनरीक्षण अथवा अन्य किसी प्रकार की कार्यवाही किये जाने का निर्णय लिया जाता है तो ऐसे निर्णय के अनुसरण में अनुभाग अधिकारी आदेश तैयार कर उसे पे्रषित किये जाने के लिए अवर सचिव के समक्ष पे्रषित किया जाता है ।
  • अवर सचिव द्वारा आदेश हस्ताक्षर के लिए प्राप्त होने पर ये सुनिश्चित किया जाता है कि आदेश अतिरिक्त सचिव अथवा प्रमुख सचिव के द्वारा दिये गये निर्देश के अनुसरण में तैयार किया गया है तथा आदेश के साथ निर्णय/आदेश एवं अन्य तात्विक दस्तावेज की प्रतियां संलग्न है। यह सुनिश्चित किये जाने के बाद अवर सचिव द्वारा आदेश में हस्ताक्षर किये जाते हैं। महाधिवक्ता कार्यालय/अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय को पे्रषित उक्त आदेश की प्रति अतिरिक्त रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय, जिला मजिस्ट्रेट, उप संचालक अभियोजन/शासकीय अधिवक्ता तथा संभागायुक्त को पे्रषित की जाती है तथा यदि जिला मजिस्ट्रेट को विशिष्ट प्रकार की कार्यवाही करने का निर्देश दिया जाता है तो आदेश रजिस्टर्ड डाक के जरिये ऐसे जिला मजिस्ट्रेट को पे्रषित किया जाता है ।
  • आदेश तैयार किये जाने के बाद उसे नस्ती के साथ जावक शाखा भेजा जाता है तथा जावक शाखा द्वारा संबंधित आदेश प्राप्तकर्ता को पे्रषित किये जाने के पश्चात् उसकी प्रविष्टि नस्ती में करते हैं तथा नस्ती को वापस शाखा को भेजा जाता है जिसे संबधित लिपिक द्वारा प्राप्त कर उसे कुछ समय पश्चात रिफरेंसर को सुरक्षित रखे जाने के लिए दिया जाता है ।
  • माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश/निर्णय की जानकारी तथा ऐसे आदेश के विरूद्ध अपील या याचिका प्रस्तुत करने का प्रस्ताव महाधिवक्ता कार्यालय से प्राप्त होने पर पूर्व में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार इसका परीक्षण किया जाता है यदि माननीय उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका प्रस्तुत करने का निर्णय लिया जाता है तो इस संबंध में आदेश अधिवक्ता पत्र तथा सुसंगत दस्तावेज के साथ राज्य के स्थायी अधिवक्ता नई दिल्ली को भेजा जाता है। विशेष अनुमति याचिका प्रस्तुत करने का आदेश उप सचिव के हस्ताक्षर से जारी किया जाता है।
  • जिन प्रस्तावों पर अग्रिम कार्यवाही न किये जाने का निर्णय लिया जाता है उनमें से जिले से प्राप्त प्रस्तावों पर दिये गये निर्णय की टीप के साथ उन्हें जिला मजिस्ट्रेट को वापस कर दिया जाता है तथा माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय/ आदेश संबंधित प्रस्ताव को नस्तीबद्ध किया जाता है तथा इसकी सूचना महाधिवक्ता को दी जाती है।

अभियोजन शाखा:

  • इस शाखा में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 में दिये गये प्रावधानों के अंतर्गत आपराधिक मामलों को लोकहित में न्यायालय से प्रत्याहरित किये जाने के संबंध में प्रस्ताव गृह विभाग से परीक्षण हेतु प्राप्त होते हैं।
  • प्रस्ताव प्राप्त होने पर शाखा द्वारा प्रस्ताव मतार्थ उप सचिव के समक्ष पेश किये जाते हैं। उप सचिव गुण-दोषों के आधार पर परीक्षण कर टीप तैयार करते हैं और टीप अतिरिक्त सचिव को अंकित की जाती है। अतिरिक्त सचिव या तो उसका अनुमोदन कर देते हैं या वेे सहमत न हो तो संक्षिप्त में अपना मत देते हैं । यह मत गृह विभाग को भेजा जाता है ।
  • गृह विभाग यदि विधि विभाग के मत से सहमत हो तो मामले का प्रत्याहरण किये जाने का आदेश जारी किया जाना हो तो नस्ती विधि विभाग को पुनः प्राप्त होती है जिस पर विधि विभाग मामले के प्रत्याहरण के आदेश भारसाधक लोक अभियोजक को देता है ।
  • यदि विधि विभाग के मत से गृह विभाग सहमत न हो तो गृह विभाग एवं विधि विभाग का मत समन्वय हेतु माननीय मुख्यमंत्रीजी के समक्ष रखा जाता है इस पर मुख्यमंत्रीजी जो आदेश देते हैं उसके अनुसार आदेश का पालन किया जाता है। यदि प्रत्याहरण का आदेश दिया गया हो तो आदेश विधि विभाग द्वारा जारी किये जाते हैं ।
  • यदि त्रुटिवश माननीय मुख्यमंत्रीजी ने ऐसे मामलों के प्रत्याहरण के आदेश दे दिये हों जिन्हें राज्य शासन दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के प्रावधान के अंतर्गत प्रत्याहरित किये जाने के लिए सक्षम न हो तो ऐसी स्थिति में विधि विभाग विस्तृत टीप लिखकर माननीय मुख्यमंत्रीजी से उनका आदेश वापस लिये जाने का अनुरोध कर सकता है ।
  • अभियोजन शाखा को जेल नियमावली के नियम 775 एवं संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत प्रस्तुत दया याचिका परीक्षण हेतु जेल विभाग से प्राप्त होती है । उप सचिव इसका परीक्षण करने के बाद याचिका स्वीकार किये जाने या अस्वीकार किये जाने की अनुशंसा के साथ अतिरिक्त सचिव को भेजते हैं। अतिरिक्त सचिव सहमत हो तो उसका अनुमोदन करते हैं उसके बाद नस्ती अनुमोदन हेतु प्रमुख सचिव महोदय एवं माननीय विधि मंत्रीजी को नस्ती भेजी जाती है। यदि दया याचिका स्वीकार न किये जाने की टीप माननीय विधि मंत्रीजी द्वारा अनुमोदित कर दी जाती है तो नस्ती महामहिम राज्यपाल की ओर नहीं भेजी जाती है। यदि दया याचिका स्वीकार किये जाने की टीप माननीय विधि मंत्रीजी द्वारा अनुमोदित हो जाती है तो मुख्य सचिव महोदय के माध्यम से नस्ती माननीय मुख्यमंत्रीजी को भेजी जाती है। माननीय मुख्यमंत्रीजी द्वारा टीप प्रस्तुत होने पर टीप महामहिम राज्यपाल महोदय को भेजी जाती है ।
  • प्रशासनिक विभाग जेल से आजीवन कारावास से दंडित बंदी को 14 वर्षीय बंदियों के नियम के अंतर्गत समय पूर्व मुक्त किये जाने के बिन्दु पर परीक्षण हेतु नस्ती इस शाखा को भेजते हैं। नस्ती को उप सचिव द्वारा परीक्षण किया जाता है और नस्ती अतिरिक्त सचिव, प्रमुख सचिव एवं माननीय विधि मंत्रीजी तक भेजी जाती है और उसके बाद नस्ती मुख्य सचिव महोदय के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्रीजी तक भेजी जाती है। यदि बंदी को समय पूर्व मुक्त किये जाने का आदेश माननीय मुख्यमंत्रीजी द्वारा दी जाती है तो इस शाखा द्वारा आदेश जारी किये जाते हैं ।
  • अभियोजन स्वीकृति हेतु नस्ती प्रशासनिक विभाग से इस विभाग को प्राप्त होता है जिसका परीक्षण उप सचिव द्वारा किया जाता है और टीप लिखकर संबंधित विभाग को भेजा जाता है। संबंधित विभाग अपने टीप सहित इस विभाग को नस्ती भेजते हैं। नस्ती प्राप्त होने पर उप सचिव अपना अभिमत लिखकर नस्ती अतिरिक्त सचिव के समक्ष प्रस्तुत करते हैं और उनके द्वारा अनुमोदन के पश्चात अभियोजन स्वीकृति आदेश विभाग द्वारा जारी किया जाता है ।
  • जिन प्रकरण में संबंधित विभाग के अभिमत से एवं इस विभाग द्वारा दिये गये अभिमत भिन्न है तो ऐसे प्रकरण समन्वय हेतु माननीय मुख्यमंत्रीजी के समक्ष रखा जाता है। जिस पर माननीय मुख्यमंत्रीजी आदेश देते हैं जिसके अनुसार आदेश का पालन किया जाता है ।

सिविल शाखा:

  • इस शाखा को अपील, रिवीजन, रिट याचिका एवं विशेष अनुमति याचिका प्रस्तुत करने के लिए प्रस्ताव जिला कलेक्टर तथा प्रशासकीय विभाग से प्राप्त होती है ।
  • शाखा में इनका परीक्षण करने के बाद अपील, रिवीजन, रिट याचिका एवं विशेष अनुमति याचिका पेश किया जाना उचित समझा जाये तो शाखा द्वारा महाधिवक्ता/अतिरिक्त महाधिवक्ता को अपील, रिवीजन, रिट याचिका एवं विशेष अनुमति याचिका पेश करने का आदेश जारी कर दिये जाते हैं ।
  • जिला कलेक्टर उप सचिव की हैसियत से महाधिवक्ता/अतिरिक्त महाधिवक्ता को आदेश देने के लिए सक्षम है। उच्च न्यायालय में अपील, रिट याचिका पेश किये जाने के प्रस्ताव जिला कलेक्टर प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति कर सीधे विधि विभाग को भेजते हैं जिनका परीक्षण इस शाखा में किया जाता है।
  • उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका प्रस्तुत किये जाने के प्रस्ताव तथा प्रतिरक्षण के आदेश दिये जाने के प्रस्ताव प्रशासनिक विभाग के माध्यम से प्राप्त होने पर विधि विभाग की इस शाखा द्वारा कार्यवाही की जाती है।
  • सिविल न्यायालय, श्रम न्यायालय, औद्योगिक न्यायालय और राज्य के बाहर पेश सिविल मामलों में अधिवक्ता नियुक्ति प्रस्ताव प्रशासनिक विभाग से प्राप्त होने पर इस विभाग द्वारा अधिवक्ता की नियुक्ति का कार्य किया जाता है। प्रस्ताव प्राप्त होने पर इस शाखा द्वारा परिसीमा की गणना की जाती है। और उसके पश्चात नस्ती का परीक्षण उप सचिव द्वारा किया जाता है जो अपनी टीप सहित अतिरिक्त सचिव को अंकित करते हैं । अतिरिक्त सचिव द्वारा अनुमोदन किये जाने पर टीप अनुसार कार्यवाही की जाती है ।
  • माध्यस्थम अधिकरण द्वारा दिये गये अवार्ड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष रिवीजन पेश करने के प्रस्ताव का परीक्षण इस शाखा द्वारा किया जाता है और आवश्यक होने पर रिवीजन पेश करने का आदेश महाधिवक्ता/ अतिरिक्त महाधिवक्ता को दिये जाते हैं ।

परामर्श शाखा:

  • विधि विभाग के नियमावली के भाग दो में विधि परामर्शी को संदर्भ किये जाने का उल्लेख है। इस शाखा में विभिन्न विभागों द्वारा विधिक अभिमत चाहे जाने के लिए इस विभाग की संबंधित नस्ती विधि विभाग के नियमावली के कंडिका 66 में उल्लेखित अधिकारी के द्वारा प्राप्त होने पर कार्यवाही प्रारंभ की जाती है। अनुभाग अधिकारी के निर्देशन में नस्ती को पंजीबद्ध कर नस्ती के परिचय के साथ उप सचिव स्तर के अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। उप सचिव स्तर का अधिकारी विभाग द्वारा प्रस्तुत नस्ती तथा संबंधित विधियों व यदि कोई पूर्व उदाहरण हो तो उन पर विचार करने के उपरांत अपना अभिमत प्रकट करता है । उप सचिव का अभिमत पुष्टि हेतु अतिरिक्त सचिव स्तर का अधिकारी के पास जाता है जिस पर अतिरिक्त सचिव अपना विचार प्रकट करते हैं। यदि दोनांे अधिकारियों के मत एक समान हो और नस्ती महत्वपूर्ण प्रकृति की न हो तो संबंधित विभाग को भेज दिया जाता है तथा विचार के लिए नस्ती भेजे जाने वाले अभिमत की कार्यालयीन प्रति के साथ उदाहरण के रूप मंे सुरक्षित रख ली जाती है । यह नस्ती आगे पूर्व उदाहरण के रूप में उपयोग में ली जाती है ।
  • सामान्यतः उप सचिव, अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों के मत में भिन्नता होने पर नस्ती प्रमुख सचिव के सम्मुख प्रस्तुत होती है तथा प्रमुख सचिव द्वारा दिया गया मत विधि विभाग का अंतिम मत होता है साथ ही माननीय मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव द्वारा संदर्भित नस्तियां तथा मंत्रिमंडल के सम्मुख रखे जाने प्रस्ताव अथवा कोई लोक महत्व के विषय पर अभिमत चाहा गया है तो उप सचिव व अतिरिक्त सचिव का मत एक होने पर भी प्रमुख सचिव के अवलोकन हेतु नस्ती भेजी जाती है तथा उक्त नस्ती पर भी प्रमुख सचिव का मत विधि विभाग का अंतिम मत होता है ।
  • मत शाखा में शासन की ओर से निष्पादित होने वाले करार अथवा अन्य दस्तावेजों के परिमार्जन का कार्य भी होता है । इस तरह शासन की ओर से यदि कोई करार निष्पादित होना है अथवा कोई अधिसूचना जारी होना है तो उसका परिमार्जन भी इस शाखा के द्वारा ही किया जाता है। इसके संबंध में भी संबंधित विभाग से प्रारूप तथा संबंधित नियम अथवा शर्तों के उल्लेख के साथ नस्ती प्राप्त होती है जिस पर विधि विभाग विचार कर उस पर उसका विधि अनुसार होना तथा प्रारूप के परिमार्जन पर विचार कर अभिमत तथा प्रारूप परिमार्जित किया जाता है ।

मैनुअल-4

अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए स्वयं द्वारा स्थापित मापमान

  • विधेयक, अधिनियम, नियम, उप नियम पारित होने के पूर्व उसका परीक्षण किया जाता है उससे पूर्व प्रचलित विधि हो तो उसको देखा जाता है। उक्त विधि का अन्य विधि से असंगतता की जांच की जाती है। विधि, संवैधानिक है या नहीं परीक्षण किया जाता है और उसकी शुद्धता की भी जांच कीजाती है ।
  • माननीय उच्च न्यायालय में महाधिवक्ता के 01 पद, अतिरिक्त महाधिवक्ता के 02 पद, उपमहाधिवक्ता के 4 पद, शासकीय अधिवक्ता के 11 पद एवं उप शासकीय अधिवक्ता के 07 पद इस तरह कुल 25 पद हैं ।
  • महाधिवक्ता की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत महामहिम राज्यपाल महोदय द्वारा की जाती है। उनकी पदावधि राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त रहता है ।
  • उप महाधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता एवं उप शासकीय अधिवक्ता के संबंध में पैनल महाधिवक्ता द्वारा भेजा जाता है। उक्त पैनल के संबंध में प्रमुख सचिव महोदय टीप के साथ अनुमोदन के लिए विधि मंत्रीजी के पास भेजते हैं और विधि मंत्रीजी द्वारा अनुमोदन के पश्चात माननीय मुख्यमंत्रीजी को नस्ती जाती है जो अनुमोदन करते हैं जिसके आधार पर आदेश जारी किया जाता है। नियुक्ति के लिए अधिवक्ता को कम से कम 07 वर्ष अनुभव होना चाहिए ।
  • राज्य के प्रत्येक जिले में लोक अभियोजक एवं अतिरिक्त लोक अभियोजक की नियुक्ति धारा 24 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत शासन द्वारा की जाती है जिसके लिए अधिवक्ता को 07 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। विशेष लोक अभियोजक के लिए 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। माननीय विधि मंत्रीजी के अनुमोदन के पश्चात नियुक्ति आदेश जारी किये जाते है।
  • राज्य में कुल नोटरियों के 600 पद हैं। नोटरियों की नियुक्ति नोटरी अधिनियम 1952 के तहत किया जाता है जिसके लिए अधिवक्ता को कम से कम 07 वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। माननीय विधि मंत्रीजी के अनुमोदन पर ही नोटरी की नियुक्ति आदेश जारी किया जाता है। जिसके लिए सामान्य अधिवक्ता को 10 वर्ष का विधि अनुभव एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अधिवक्ता को 07 वर्ष का विधि अनुभव आवश्यक है।
  • स्पेशल मेरिज एक्ट 1954 की धारा 3 के तहत विवाह अधिकारी की नियुक्ति की जाती है और मेरिज अनुष्ठापित कर मेरिज सर्टीफिकेट प्रदान करने के लिए लाइसेंस दिया जाता है जिसके लिए माननीय विधि मंत्रीजी के अनुमोदन आवश्यक है।
  • अभियोजन स्वीकृति के लिए धारा 195, 196, 197 दण्ड प्रक्रिया संहिता, धारा 19 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दिये गये प्रावधान का अनुसरण कर स्वीकृति आदेश जारी किया जाता है। प्रकरण वापसी के लिए धारा 321 दण्ड प्रक्रिया संहिता का पालन किया जाता है ।
  • अपील, रिवीजन एवं याचिका पेश करने के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, सिविल प्रक्रिया संहिता, साक्ष्य अधिनियम और संविधान के प्रावधान का अनुसरण किया जाता है ।

मैनुअल-5

अपने द्वारा या अपने नियंत्रणाधीन धारित या अपने कर्मचारियों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रयोग किए गए नियम, विनियम, अनुदेश, निर्देशिका और अभिलेख

    इसमें मुख्य रूप से विभाग द्वारा विधि विभाग नियमावली का अनुसरण किया जाता है । विभाग द्वारा प्रशासित अधिनियम और नियम निम्नानुसार है:-
  • छत्तीसगढ़ सिविल न्यायालय अधिनियम, 1958.
  • न्यायालय शुल्क अधिनियम, 1870.
  • लघुवाद न्यायालय अधिनियम, 1949.
  • वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1887.
  • दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973.
  • हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955.
  • हिन्दू अवयस्कता और अभिभावकत्व अधिनियम, 1956.
  • हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956.
  • हिन्दू दत्तक ग्रहण और भरण पोषण अधिनियम, 1956.
  • पारसी विवाह और विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1936.
  • विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1869.
  • मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939.
  • धर्मान्तरिती विवाहोच्छेद अधिनियम, 1866.
  • ईसाई विवाह अधिनियम, 1872.
  • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925.
  • संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882.
  • संविदा अधिनियम, 1872.
  • भागिता अधिनियम, 1932.
  • विर्नििर्दष्ट अनुतोष (स्पेसिफिक रिलीफ) अधिनियम, 1963.
  • प्रांतीय शोधक्षमता अधिनियम, 1920.
  • न्यास अधिनियम, 1882.
  • शासकीय न्यासी अधिनियम, 1913.
  • महाप्रशासक अधिनियम, 1963.
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872.
  • शपथ अधिनियम, 1969.
  • सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908.
  • अधिवक्ता अधिनियम, 1961.
  • नोटरीज अधिनियम, 1952.
  • न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971.
  • भारतीय दण्ड संहिता, 1860.
  • दण्ड विधि संशोधन अधिनियम, 1932.
  • छत्तीसगढ़ माध्यस्थम अधिकरण अधिनियम, 1983.
  • आर्बिट्रेशन एंड कंसीलिएशन एक्ट, 1996.
  • परिसीमा (लिमिटेशन) अधिनियम, 1963.
  • विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987.
  • विधिक सेवा प्राधिकरण नियम, 2002.
  • छत्तीसगढ़ ग्राम न्यायालय अधिनियम, 1996.
  • छत्तीसगढ़ ग्राम न्यायालय नियम, 2001.
  • अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम, 1983.
  • छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (खण्डपीठ न्यायपीठ को अपील) अधिनियम 2006
  • छत्तीसगढ़ विवाह का अनिवार्य पंजीयन नियम 2006.
  • छत्तीसगढ़ कुटुम्ब न्यायालय नियम, 2007
  • बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल पुरस्कार नियम, 2007
  • छत्तीसगढ़ समाज के कमजोर वर्गों के लिए विधिक सहायता तथा विधिक सलाहकार अधिनियम, 1976
  • छत्तीसगढ़ हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्विद्यालय अधिनियम, 2003.
  • छत्तीसगढ़ निम्नतर तथा उच्चतर न्यायिक सेवा (वेतन पुनरीक्षण) नियम, 2003.
  • छत्तीसगढ़ उच्चतर न्यायिक सेवा (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम, 2006.
  • छत्तीसगढ़ निम्नतर न्यायिक सेवा (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम, 2006.
  • विधि विभाग नियमावली
  • अभिलेख जो इस विभाग द्वारा रखे जाते हैं -
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति, न्यायाधीशों की प्रतिनियुक्ति के संबंध में आदेश ।
  • महाधिवक्ता, उपमहाधिवक्ता, अतिरिक्त महाधिवक्ता, शासकीय अभिभाषक, अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक की नियुक्ति संबंधी आदेश ।
  • उच्चतम न्यायालय में स्टेंडिंग कौंसिल की नियुक्ति ।
  • जिलों में शासकीय अभिभाषक की नियुक्ति
  • नोटरियों की नियुक्ति संबंधी आदेश ।
  • विवाह अधिकारियों की नियुक्ति आदेश ।
  • प्रतिरक्षण आदेश ।
  • अधिनियम, नियम, उप नियम, विधेयक, अध्यादेश अधिसूचना।
  • अभियोजन स्वीकृति आदेश संबंधी अभिलेख ।
  • विधिक सेवा प्राधिकरण से संबंधित आदेश एवं बजट ।
  • न्यायालयों की स्थापना एवं बजट संबंधी कार्यवाही ।
  • माध्यस्थम अधिकरण से संबंधित आदेश एवं बजट।
  • हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से संबंधित आदेश एवं बजट।

मैनुअल-6

ऐसे दस्तावेजों के जो उसके द्वारा धारित या उसके नियंत्रणाधीन हैं प्रवर्गों का विवरण

विभाग के उपलब्ध शासकीय प्रवर्गों की सूची संक्षेप में मैनुअल - 5 में स्पष्ट की गई है, यही दस्तावेज विभाग में उपलब्ध रहते हैं।

मैनुअल-7

किसी व्यवस्था की विशिष्टियां जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।

नीति निर्धारण हेतु जनता या जन प्रतिनिधि के परामर्श/भागीदारी का कोई प्रावधान नहीं है।

मैनुअल-8

ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के विवरण जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं जिनका उसके भाग रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी ।

विधिक सेवा प्राधिकरण:- कार्यालय का पता - विधिक सेवा मार्ग, बिलासपुर (छ.ग.)

विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत एक न्यायाधीश के साथ-साथ दूसरे सदस्य होते हैं जो जनता से मनोनीत किये जाते हैं । उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति में 8 सदस्य होते हैं । तहसील विधिक सेवा समिति में 5 सदस्य होते हैं । इन समितियों द्वारा स्थायी निरंतर लोक अदालत का आयोजन, विधिक शिविर का आयोजन, विधि ज्ञान सामग्री का प्रचार-प्रसार और विधिक सलाह दी जाती है। उनके द्वारा किये गये कार्य गोपनीय नहीं होता है बल्कि सर्वसाधारण के लिए खुला है ।

माध्यस्थम अधिकरण:- कार्यालय का पता- शहीद वीर नारायणसिंह परिसर, घड़ी चैक रायपुर (छ.ग.)

छत्तीसगढ़ माध्यस्थम अधिकरण अधिनियम 1983 - 50 हजार रूपये से अधिक के वर्क संबधी शासन एवं सार्वजनिक उपक्रम के विवादों का निपटारा हेतु अधिकरण गठित है जिसके अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार तिवारी, न्यायिक सदस्य श्री सी.बी.एस. पटेल एवं तकनीकी सदस्य श्री पी.एस. क्षत्री, अधिकरण के रजिस्ट्रार जनरल श्री लखन सिंह हैं। अधिकरण शहीद वीर नारायणसिंह परिसर, घड़ी चैक रायपुर में कार्यरत है ।

हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय:- उपरवारा, नया रायपुर (छ.ग)

हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जिसकी स्थापना, हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय अधिनियम 2003 के तहत हुई है, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के सेक्शन 2 (एफ) तथा 12बी तथा बार काउंसिल आॅफ इण्डिया के एड्व्होकेट्स एक्ट की धारा 7 (1) के तहत अनुमोदित है।

महाधिवक्ता कार्यालय:- कार्यालय का पता- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय परिसर, बोदरी बिलासपुर (छ.ग.)

Introduction : The Advocate General office of Chhattisgarh came into existence on November 2000 upon the formation of the State of Chhattisgarh. as per the State Re-Organisation Act 2000 when the High Court of Chhattisgarh was established. On the formation of the new State of C.G., Shri Hon’ble Ravindra Shrivastava became the first Advocate General for the State of Chhattisgarh. The AG's Office presents all the cases in which the Govt.of Chhattisgarh is one of the parties, in the High Court of C.G. Hon'ble Shri Devraj Singh Surana is the Advocate General at present. His companion Law officers are as under :-

Sno.NameDesignation
1Shri Jugal Kishor GildaAdvocate General
2Shri prafull Kumar BharatAddl. Advocate General
3Shri Ashutosh Singh KachawahaAddl. Advocate General
4Shri Yashvant Singh ThakurAddl. Advocate General
5Shri Arun SaoDy. Advocate General
6Shri Ramakant MishraDy. Advocate General
7Shri Sunil KaleDy. Advocate General
8Shri Rajkumar GuptaDy. Advocate General
9Shri B. Gopa KumarDy. Advocate General
10Shri Ashish ShuklaDy. Advocate General
11Shri Anil PilleDy. Advocate General
12Shri Anupam DubeyDy. Advocate General
13Shri Sangharsh PandeyDy. Advocate General
14Shri Adhiraj SuranaDy. Advocate General
15Shri Dilmanrati MinjDy. Advocate General
16Shri Niraj Kumar SharmaDy. Advocate General
17Shri Anand DadriyaDy. Advocate General
18Shri Niraj Syad Majid AliDy. Advocate General
19Shri Satish GuptaGovt. Advocate
20Shri Prasun BhaduriGovt. Advocate
21Shri Shasank ThakurGovt. Advocate
22Shri U. N. S. DevGovt. Advocate
23Shri Sanjeev PandeyGovt. Advocate
24Shri Vivek SharmaGovt. Advocate
25Shri Anil PandeyGovt. Advocate
26Shri Dhiraj WankhedeGovt. Advocate
27Shri Ratan PustiGovt. Advocate
28Shri Ravindra AgrawalGovt. Advocate
29Shri Geri MukhopadhyayGovt. Advocate
30Shri Ravindra AgrawalPanel Lawyer
31Shri Umakant ChandelPanel Lawyer
32Shri Neeraj Kumar HotaPanel Lawyer
33Smt. Sunita JainPanel Lawyer
34Smt. Madhunisha SinghPanel Lawyer
35Shri Arvind DubeyPanel Lawyer
36Shri Ajit SinghPanel Lawyer
37Shri Vaibhaw A. GoverdhanPanel Lawyer
38Smt. Smita GhaiPanel Lawyer
39Shri Chandrsh ShrivastavaPanel Lawyer
40Shri Vindo TekamPanel Lawyer
41Shri Bhaskar PyasiPanel Lawyer
42Shri A. V. ShridharPanel Lawyer
43Shri Avinash K. MishraPanel Lawyer
44Shri Arvind ShuklaPanel Lawyer
45Shri Sumit JhanwarPanel Lawyer
46Shri Surykant MishraPanel Lawyer
47Shri Anant BajpeyeePanel Lawyer
48Shri Manish NigamPanel Lawyer
49Shri Adil MinhajPanel Lawyer
50Shri Wasim MiyaPanel Lawyer
51Shri Rahul TamskarPanel Lawyer
52Shri Saiyyd Majid AlliPanel Lawyer
53Shri Vivek SinghalPanel Lawyer
54Shri Ramakant PandeyPanel Lawyer
55Shri Ashok SwarnkarPanel Lawyer
56Shri Ashutosh PandeyPanel Lawyer
57Smt. A. AshaPanel Lawyer
58Shri Lav Kumar SharmaPanel Lawyer
59Shri Sameer BeharPanel Lawyer
60Shri S. R. J. JayswalPanel Lawyer
61Shri Varun ShrmaPanel Lawyer
62Shri Aditya SharmaPanel Lawyer
63Shri Suvigya AwashtiPanel Lawyer
64Shri Vijay Bahadur SinghPanel Lawyer
65Shri Ashish SuranaPanel Lawyer
66Ku. Meha KumarPanel Lawyer
67Shri Avinash SinghPanel Lawyer
68Shri Rajkumar JayswalPanel Lawyer
69Smt. Astha SharmaPanel Lawyer
70Ku. K. Tripti RaoPanel Lawyer
71Shri Rajendra TripathiPanel Lawyer

The Advocate General of a State is a Constitutional post and authority duly appointed as per Art. 165 of the constitution of India. The authority and function of the Advocate General is also specified in the Constitution of India under Article 165 & 177.

Article 165 : - The OIC attending the A.G. office must first contact the Addl. Advocate General/Administrative Officer and thereafter the concerned Section Incharge, depending upon the nature of the case and the purpose of his attending the office. On obtaining the file from the relevant Section the OIC is thereafter required to appear before the concerned Law Officer for preparation of return. After the return has been prepared and is duly complete with all legible documents and authorisation the same should be submitted by the OIC to the Section Incharge for the purposes of filing alongwith the file of the case before leaving the A.G. Office.

Every Minister and the Advocate-General for a State shall have the right to speak in, and otherwise take part in the proceedings of, the Legislative Assembly of the State, or , in the case of a State having a Legislative Council, Both Houses, and to speak in, and otherwise to take part in the proceedings of, any committee of the Legislature of which he may be named a member but shall not , by virtue of this Article, be entitled to vote.

The Hon’ble supreme Court of India taking into account the above mentioned Articles has held that :-

  • " 12: The Office of and Advocate General is an exalted one. He is the Supreme law officer of the State"
  • " 18: Under Article 177 he is conferred the right to audience before the Legislature of a State both in the Assembly and the Council. Infect, he is treated on a per with Minister."

Refer:- (1994) I Supreme Court Cases 184 Joginder Singh Wasu V/s State of Punjab.

The Advocate General and his Law officers are basically engaged to deal with the court cases in the High Court by the State Government and the relationship between the Government and Law Officers is that of a client and counsel.

Refer:-(1994) II SCC 204

State of U.P. & others v/s U.P. State Law Officers Associations & others. The Advocate General and his office defends and protects the interest of the State Government and gives invaluable legal guidance to the State Government in formulation of its policy and execution of its decisions. There are mainly 4 sections in the Advocate General office for the purpose of managing and handling the huge number of cases in the Office:-

  • Constitutional Section
  • Criminal Section
  • Civil Section

Information for OICs The OIC attending the A.G. office must first contact the Addl. Advocate General/Admi- nistrative Officer and thereafter the concerned Section Incharge depending upon the nature of the case and the purpose of his attending the Office. On obtaining the file from the relevant Section, the OIC is thereafter required to appear before the concerned Law Officer for preparation of return. After the return has been prepared and is duly completed with all legible documents and authorisation, the same should be submitted by the OIC to the Section Incharge for the purposes of filing alongwith the file of the case before leaving the A.G. Office.

The system as prevalent in the C.G. High Court as on date is that in all cases filed in the High Court of C.G. in which the State Government is a party, an advance copy of the petition is served on the Advocate General of High Court. The Law Officers attend the cases on the basis of the advance copy. In cases where vital interest of the State Government is involved and specific information in this respect is made available to the Advocate General Office before the case comes up for hearing, appropriate steps in accordance with the information received from the State Government are taken by the concerned Law Officers before the Courts.

The orders if any of interim nature passed in any of the petitions are communicated by the A.G. office to the concerned Department and Officers. The State Government on receiving information appoints officer Incharge of the cases who after collecting all relevant records and information attends the Advocate General office for the purposes of preparing returns or counters as the case may be.

मैनुअल-9

विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों की निर्देशिका

विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नाम एवं पद:-

Sno.Officers' / Employees' NamePost NameAddress
Contact No.
(O) (R) (M)
1Shri Ravishanker SharmaPrincipal SecretaryD-1/9 Officer's Colony, Devendra Nagar, Raipur (C.G.)
0771-25103460771-25210339424169233
2Shri Manish Kumar ThakurAdditional Secretary (Law)E-2/14 Officer's Colony, Devendra Nagar, Raipur (C.G.)
0771-25107890771-28844409425536390
3Shri Pankaj Kumar SinhaAdditional Secretary (Law)E-1/7 Officer's Colony, Devendra Nagar, Raipur (C.G.)
0771-25107890771-28800539525536390
4Shri U. K. KatiyaAdditional Secretary (Law)Chourasia Colony, Santoshi Nagar, Raipur (C.G.)
0771-25107909827268439
5Ku. Deepa KatareDeputy SecretaryE-2/28 Officer's Colony, Devendra Nagar, Raipur (C.G.)
0771-2510343077128848779425110941
6Shri Harish Chandra MishraDeputy SecretaryRamprasth Greens, Sector-9, Vaishali Gajiabad (U.P.)
8839537629
7Shri T. C. TripathiDeputy SecretaryVijeta Complex, New Rajendra Nagar, Raipur (C.G.)
077125103409827466565
8Shri P. N. TripathiDeputy SecretaryVijeta Complex, New Rajendra Nagar, Raipur (C.G.)
0771-25103559424229795
9Shri Anil Kumar SinhaUnder SecretaryG-7, Pankaj Vikram Apartment, Shailendra Nagar, Raipur (C.G.)
0771-25107859826127037
10Shri Sem Singh MaraviUnder SecretaryKanhaiya City Colony, Home No. 37, Bandhwa Para, Sarkanda, Bilaspur (C.G.)
0771-25107929589780607
11Shri Dinesh KadamUnder SecretaryMD-289, Hirapur, Raipur (C.G.)
0771-25107879993230141
12Shri Kishan Lal BagdeUnder SecretaryM-2/38, Face-1, Kabir Nagar, Raipur (C.G.)
0771-25107869424213368
13Shri Yogendra SinghUnder SecretaryG-2/203, GAD Colony, Kabir Nagar, Raipur (C.G.)
0117-25107919754175554
14Shri Brijendra Prasad SohgauraUnder SecretaryNutan Colony, Sarkanda, Bilaspur (C.G.)
0771-25103549406230693
15Shri O. P. SitokeUnder SecretaryHIG-119, Vijeta Complex, New Rajendra Nagar, Raipur (C.G.)
9617979646
16Shri Krishndutt JhariyaSenior Account OfficerQtr. No. 14, Jain Colony, Near Amrapali Society, Raipur (C.G.)
0771-25103419589344635
17Shri Shekhar DeshmukhStaff OfficerPiyush Colony, C-3, Amlidih, Raipur (C.G.)
9584519400
18Shri Dileep Kumar SenAssistant Director (Translate)Sulekh Sadan, Sector-2, Awadhpuri, Bhatagaon, Raipur (C.G.)
9630398044
19Shri Ran Bahadur GyawaliSection OfficerKashi Ram Nagar, H-8, Raipur (C.G.)
9893468102
20Shri Vijay SurjuseAssistant Grade IF-3, Flat No. 602, Sector-27, Naya Raipur (C.G.)
9171933248
21Shri. A. K. MishraAssistant Grade ISector-27, Naya Raipur (C.G.)
9165551649
22Shri Nandan Singh BishtAssistant Grade IVijeta Complex, Senior MIG-219, New Rajendra Nagar, Raipur (C.G.)
9770132559
23Smt. Pankhuri VermaAssistant Grade I
24Shri Dinesh Chandra SahuAssistant Grade IMathpurena, Raipur (C.G.)
9039221278
25Shri Chhatrapal Singh SonwaniAssistant Grade IMD-266, Hirapur Raipur (C.G.)
9893877445
26Shri Murali VermaAssistant Grade ISaddu, Raipur (C.G.)
9302503035
27Shri Omkeshwar DewanganAssistant Grade ISudhir Mukherji Ward-65, Lakhe Nagar, Hanuman Nagar, Raipur (C.G.)
9827960829
28Shri Shyam Lal MahanadAssistant Grade IMouli Para, Telibandha, Raipur (C.G.)
9165628428
29Shri Ram Singh MarkamAssistant Grade-2H.No.-P2A/619, Sector-27, Naya Raipur (C.G.)
9993193902
30Shri Ashok Kumar YadavAssistant Grade-2Amapara, Raipur (C.G.)
8103355755
31Smt. Rajni SoniAssistant Grade-2C/o Shri Hiralal Moti Lal Soni, Budhapara, Khariyarwada, Raipur (C.G.)
9098644370
32Shri Bupendra KewatAssistant Grade-2Dindyal Awas, Kabir Nagar, Raipu (C.G.)
9826622032
33Smt. Shail SahuAssistant Grade-2Chhattisgarh Nagar, Raipur (C.G.)
9977487483
34Shri Santosh NishadAssistant Grade-2
35Shri Heerachand BaghelAssistant Grade-2Flat No.-106, Block-17, Sector-27, Naya Raipur (C.G.)
9406355200
36Shri Santosh KarsalAssistant Grade-2Mahesh Colony, Gali No. 4, Gudhiyari, Raipur (C.G.)
8889978571
37Shri Avinash KujurAssistant Grade-2Flat No.-202, Block-17, Sector-27, Naya Raipur (C.G.)
9406018775
38Shri Sanchay SwamiAssistant Grade-2H-1/305, Sector-17, Naya Raipur (C.G.)
9770565086
39Shri Virendra Kumar ChauhanAssistant Grade-2P2A-612, Sector-27, Naya Raipur (C.G.)
9302818043
40Shri Rupesh Kumar DhruwAssistant Grade-2Tikrapara, Raipur (C.G.)
9575980241
41Smt. Rajmani TirkeyAssistant Grade-2H-1, Mahila Polytechnic, Bairan Bazar, Raipur (C.G.)
8959761009
42Shri Vinay YadavAssistant Grade-2RDA Colony, Tikrapara, Raipur (C.G.)
9753674764
43Shri Gopeshwar VermaAssistant Grade-3Paras Nagar, Raipur (C.G.)
9425290037
44Shri Tarun Kumar DhritlahreAssistant Grade-3Chhatouna, Mandir Hasoud, Naya Raipur (C.G.)
9754787310
45Shri Rajdhar PatelAssistant Grade-3Kashi Ram Nagar, H-89, Raipur (C.G.)
9575975495
46Smt. Rashmi SharmaAssistant Grade-3Radhaswami Nagar, Qtr. No. E-20, Bhatagaon, Raipur (C.G.)
8959003838
47Shri Sourabh ShrivastavaAssistant Grade-3HIG-3, Megh Malhar, Hirapur, Raipur (C.G.)
9826700990
48Shri R. K. SinghAssistant Grade-3H.No.-61, Mahadev Vatika, Amleshwar, Raipur (C.G.)
9893971944
49Smt. Prabha SuklaAssistant Grade-3Proffessor Colony, Behind Kali Mandir, Raipur (C.G.)
9827168175
50Shri V. N. SwarnkarAssistant Grade-3Sarkanda, Bilaspur (C.G.)
9826158690
51Shri Ravindra PathakProtocol AssistantGarima Garden, Pasounda Sahibabad, Dist.-Gajiabad (U.P.)
52Shri Heeradhar SahuPersonal Assistant/Stenographer (Hindi)RDA Colony, L-6, Tikrapara, Raipur (C.G.)
9926140631
53Smt. Prabha KharePersonal Assistant/Stenographer (Hindi)Rajendra Nagar, Near Budhi Maa Mandir, Katora Talab, Raipur (C.G.)
9879904150
54Smt. Pushpa PounikarPersonal Assistant/Stenographer (Hindi)Sector-27, Naya Raipur (C.G.)
7999865243
55Shri. Aishwarya Kumar DewanganPersonal Assistant/Stenographer (Hindi)Village-Kunwargarh (Kunra), Dharsinwa, Raipur (C.G.)
9926143566
56Smt. Rajkumari SoniPersonal Assistant/Stenographer (Hindi)A-113, Matri Nagar, Sundar Nagar, Raipur (C.G.)
9926903632
57Smt. Kalpna NiyalPersonal Assistant/Stenographer (Hindi)H.No.-7, Sector-1, Gitanjali Nagar, Durga Chowk, Raipur (C.G.)
7440597474
58Shri Chhote Lal ManjhiPersonal Assistant/Stenographer (Hindi)Secto- 17, Naya Raipur (C.G.)
9575638720
59Shri Ajay TiwariPersonal Assistant/Stenographer (English)GAD Colony, G-2, Qtr. No.-303, Kabir Nagar, Raipur (C.G.)
9098597753
60Smt. Ruhinaz KhanPersonal Assistant/Stenographer (English)C/o Chand Tyres, K.K. Road, Moudhapara, Raipur (C.G.)
9098597753
61Ku. B. KalawaitPersonal Assistant/Stenographer (English)EWS-2800, Industrial Area, Housing Board, Bhilai (C.G.)
9691428706
62Shri Dinesh SahuSteno TypistBoriakhurd, Raipur (C.G.)
9691428706
63Ku. Jyoti PandeyChief TranslatorSector- 27, Naya Raipur (C.G.)
9977170198
64Shri Sanat Kumar DahariyaChief TranslatorVill.+ Post-Chhachhanpairy, Abhanpur, Raipur (C.G.)
9406209999
65Shri Bhagwat PrasadTranslatorPower House Bhilai, Durg (C.G.)
8349342998
66Shri Shailendra Kumar ChandrawanshiTranslatorSector-27, Naya Raipur (C.G.)
8085575816
67Smt. Smita ShuklaTranslator
68Shri Govind Ram SahuTranslatorMegha, Magarlod, Dhamtari (C.G.)
9893768892
69Shri Mukesh Kumar ThakurTranslatorSector-27, Naya Raipur (C.G.)
8225921251
70Shri Pukhraj SahuLibrarianG 6-104, Sector-17, Naya Raipur (C.G.)
9691168218
71Shri Someshwar PatraComputer OperatorVijeta Complex, New Rajendra Nagar, Raipur (C.G.)
9479022202
72Smt. Jyoti YadavComputer OperatorBramhadev Colony, Gali No. 2, Bhatagaon, Raipur (C.G.)
9406422266
73Shri Dharmendra VermaData Entry OperatorMD-207, Veer Sawarkar Nagar, Hirapur Raipur (C.G.)
9926654313
74Shri SameerDriver
75Shri Bajendra Singh KanwarDriver
76Shri Mukesh Kumar DhhidhhiDriver
77Shri Heera Lal PatelDriver
78Shri Netram KewatDriver
79Shri Ramkrishna VermaDaftari
80Shri Sant Ram BansodPeon
81Shri Gopal DevnathPeon
82Shri Amit Singh ThakurPeon
83Shri Rajesh NishadPeon
84Smt. Parwati YadavPeon
85Shri Raju JhabaPeon
86Shri Rajendra PatilPeon
87Smt. Surja SonwaniPeon
88Shri Sunil Kumar BhartiPeon
89Shri Pitambar DhruwPeon
90Shri Asha Ram SahuPeon
91Smt. Gudiya Devi PalPeon
92Shri Dinesh PatelPeon
93Shri ShivcharnPeon
94Shri Rameshwar Lal NetamPeon
95Shri Girish Kumar YaduPeon
96Shri Ramnath MowarPeon
97Smt. ReenaPeon
98Shri Radheshyam SahuPeon
99Shri Suraj Prasad DewanganPeon
100Shri Sanjay Kumar EkkaPeon
101Shri Ashish Kumar KujurPeon
102Shri Akshay ChiwandePeon
103Smt. Sumitra MehtrePeon

मैनुअल-10

विधि और विधायी कार्य विभाग के प्रत्येक अधिकारी/कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक जिसमें उसके विनियमों में यथाउपबंधित प्रतिकर की प्रणाली सम्मिलित है।

विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को मासिक पारिश्रमिक राज्य शासन द्वारा निर्धारित वेतनमान, पद के अनुसार दिया जाता है।

पदनामवेतन मैट्रिक्स लेवल
Principal Secretary70290-76450
Additional Secretary37400-67000 + 8700 (ग्रेड पे) Level-15
Additional Secretary51550-63070
Deputy Secretary15600-39100 + 7600 (ग्रेड पे) Level-14
Deputy Secretary51550-63070
Under Secretary15600-39100 + 6600 (ग्रेड पे) Level-13
Senior Account Officer15600-39100 + 7600 (ग्रेड पे) Level-14
Staff Officer15600-39100 + 6600 (ग्रेड पे) Level-13
Assitant Director (Translation)9300-34800+4400 (Grade Pay) Level 10
Section Officer9300-34800 + 4800 (ग्रेड पे) Level-11
Personal Secretary9300-34800 + 4800 (ग्रेड पे) Level-11
Assitant Account Officer9300-34800 + 4200 (ग्रेड पे) Level-08
Assistant Grade I9300-34800 + 4300 (ग्रेड पे) Level-09
Assistant Grade-25200-20200 + 2400 (ग्रेड पे) Level-06
Assistant Grade-35200-20200 + 1900 (ग्रेड पे) Level-04
Protocol Assistant5200-20200 + 1900 (ग्रेड पे) Level-04
Stenographer5200-20200+ 2800 (ग्रेड पे) Level-07
Stenographer9300-34800 + 4300 (ग्रेड पे) Level-09
Steno Typist5200-20200 + 1900 (ग्रेड पे) Level-04
Chief Translator9300-34800 + 4300 (ग्रेड पे) Level-09
Translator9300-34800 + 4200 (ग्रेड पे) Level-08
Librarian9300-34800 + 4200 (ग्रेड पे) Level-08
Assistant Librarian5200-20200+ 2800 (ग्रेड पे) Level-07
Personal Assistant9300-34800 + 4800 (ग्रेड पे) Level 11
Accountant5200-20200 + 2400 (ग्रेड पे) Level-06
Computer Operator5200-20200 + 2400 (ग्रेड पे) Level-06
Data Entry Operator5200-20200 + 2400 (ग्रेड पे) Level-06
Driver5200-20200 + 1900 (ग्रेड पे) Level-04
Daftari4750-7440 + 1400 (ग्रेड पे) Level 02
Peon4750-7440 + 1300 (ग्रेड पे) Level-01

मैनुअल-11

सभी योजनाओं, प्रस्तावित व्ययांे और किए गए संवितरणों पर रिर्पोटों की विशिष्टियां उपदर्शित करते हुए अपने प्रत्येक अभिकरण को आबंटित बजट।

विधि विभाग द्वारा अधीनस्थ कार्यालयों को वर्षवार विभिन्न योजनावार आबंटन एवं किए गए व्यय की जानकारी

(राशि लाख रू. में)

Subordinate Offices2016-17 Expense (Rs. In thousand)2017-18 Alloted Budget (Rs. In thousand)
    CHARGED
   573 - High Court (Charged)370286599600
   9056 - Arbitration Tribunal1036920275
    Total 380655619875
    VOTED
   1912 - Dand Nyayalaya6617300
   2015 - Election Officer354292464710
   2410 - Nirvah Patr Tamil Sthapna101234169790
   2918 - Grant for Library to Baar Association459315000
   3255 - Establishment Grant, SLSA (Plan)05000
   3255 - Social Security and Welfare97253192120
   3428 - Advocate General80992121740
   3572 - Mofusil Establishment6967093570
   4059 - ADR Center (Construction)6855220000
   4497 - General Establishment11768971694904
   5136 - Grant to State Legal Service Authority (Plan)03000
   5136 - Grant to State Legal Service Authority (Plan)07000
   5171 - Establishment of Special Court (Plan)3334763580
   5416 - Family Court102604179142
   5421 - Chhattisgarh State Judicial Academy (Construction)5000050000
   5421 - Chhattisgarh State Judicial Academy3697253760
   5464 - Establishment of National Law School in State (Moot Court)40000
   5464 - Establishment of National Law School in State (Construction)080000
   5464 - Establishment of National Law School in State1600050000
   7256 - Computerization of Courts2940294000
   7502 - Establishment of C.B.I. Court35267640
   7798 - Commercial Court561516502
   8998 - Indian Law Insititue01000
   9057 - Law and Legislative Affairs5653487470
    Total 22304473677228
    Grand Total 26111024297103

मैनुअल-12

सहायिकी कार्यक्रमांक के निष्पादन की रीति जिसमें आबंटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों के फायदाग्राहियों के ब्यौरे सम्मिलित हैं।

निरंक ।

मैनुअल-13

अपने द्वारा अनुदत्त रियायतों, अनुज्ञापत्रों या प्राधिकारों के प्राप्तिकर्ताओं की विशिष्टियां

विभाग द्वारा कोई रियायत/अनुज्ञा-पत्र जारी नहीं किया जाता है।

मैनुअल-14

किसी इलेक्ट्रानिक रूप में सूचना के संबंध में ब्यौरे, जो उसको उपलब्ध हों या उसके द्वारा धारित हों।

निरंक ।

मैनुअल-15

सूचना अभिप्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं की विशिष्टियां, जिनके अंतर्गत किसी पुस्तकालय या वाचनकक्ष के यदि लोक उपयोग के लिए अनुरक्षित हैं तो कार्यकरण घंटे सम्मिलित हैं ।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग में सूचना केन्द्र स्थापित किया गया है । कोई व्यक्ति सूचना केन्द्र से कोई भी सूचना निर्धारित प्रपत्र में आवेदन देकर कार्यालयीन समय में प्राप्त कर सकता है । संशोधित सभी नियम एवं अधिनियम सूचना केन्द्र में उपलब्ध कराया जावेगा ।

मैनुअल-16

विभाग द्वारा जनता को सूचना उपलब्ध कराने हेतु निम्न अधिकारी नियुक्त हैं, जिनका विवरण निम्नानुसार है:-

मैनुअल-17

ऐसी अन्य सूचना, जो विहित की जाए

                 सूचना प्राप्त करने के संबंध में आवेदन पत्र के प्रारूप में निम्नलिखित बातों का उल्लेख होना चाहिए:-

प्रारूप:

  • आवेदक का नाम एवं पता
  • आवेदक का व्यवसाय
  • सूचना का विवरण
  • आवेदक का सूचना से संबंध
  • आवश्यकता
  • सूचना का संबंध किसी अन्य व्यक्ति से हो तो उसका विवरण
  • मांगी गई सूचना के संबंध में पूर्व में अगर कोई आवेदन पत्र दिया गया हो तो उसकी संपूर्ण जानकारी ।
  • निर्धारित शुल्क जमा करने का विवरण ।
  • संलग्न सूची ।

हस्ताक्षर....................................................
आवेदक का नाम........................................
पता ........................................................

                 आवेदक आवेदन पत्र के प्रारूप की समस्त प्रवृष्टि पूर्ण कर आवेदन पत्र को सूचना केन्द्र में जमा कराएगा । आवेदन करने के बाद उपरोक्त आवेदन पत्र पर सहायक जन सूचना अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जन सूचना अधिकारी की अनुमति प्राप्त होने पर चाही गई सूचना की प्रति तैयार कर आवेदक को विधिवत प्रदान किया जाएगा ।